फोटोग्राफी और पैसे

फोटो स्कूल में हमे कई बार यह सुनने को मिला की फोटोग्राफी में पैसे कमाना मुश्किल है। यह एक बहुत ही कठिन यात्रा है जिस पर सालों साल आप चल सकते है बिना किसी मेहताने के । थोड़ी बारीकी से देखा जाये तो इस के ३ मुख्य कारण हैं –

१) फोटोग्राफी एक असिम्मिलित क्षेत्र है। यहाँ कोई रेगुलेटरी एजेंसी नहीं है – जो इस क्षेत्र में आने वाले काम की दर तय करे।फोटोग्राफर अपने अनुभव और कौशल, काम की कठिनाई और कभी कभी ग्राहक के पेइंग कैपेसिटी के आधार पर है काम की कीमततय करते हैं । तो खुले मैदान में जहाँ मन करे वहां दौड़ लगाई जा सकती है।

२) बहुत से ग्राहक और फोटोग्राफर सोचते है की फोटोग्राफी आसान है । कोई भी कैमरा ले कर फोटो बना सकता है । टेबल पर रखकर, पेड़ के पास खड़े होकर, स्टेज पर चढ़ कर बस पोज़ करना है, बाकी काम तो कैमरा करता है, शटर दबाने वाला तो सिर्फ उंगली काइस्तेमाल करता है । इसीलिए ५० रुपये प्रति पिक्चर, १०० रुपये प्रति पिक्चर, ५ हज़ार में पूरी शादी, १० हज़ार में बड़ा शूट, इस तरहकी काम की दर हर जगह फैली है । और क्यूंकि यह आसान है इसीलिए ज्यादा बजट क्यों रखों ?

३) मांग और आपूर्ति जिसे हम डिमांड एंड सप्लाई भी कहते है । फोटोग्राफर ज्यादा है, और ज्यादा हो रहे हैं । कमाना सबको है, खानातो सब ही खाएंगे, पर काम तो उतना ही है – कैसे मिलेगा? एक दूसरे को काटना पड़ेगा।

करीब २ वर्ष पूर्व, दयनीता सिंह ने एक लेख में यह विचार प्रकट किया की क्यूंकि फोटोग्राफी में पैसे कमाने मुश्किल है इसीलिए नए फोटोग्राफरों को एक नौकरी साथ में करनी चाहिए । पिछले दिनों पाब्लो बार्थोलोम्यु ने भी ऐसे ही विचार रखे हैं – वह कहते है कीअगर आपके पास एक नौकरी है तो उससे करते रहिये और फोटोग्राफी को एक गहरे शौक़ की तरह रखिये ।

मेरा निजी विचार इस बारें में यह है की अमुमलं हर क्षेत्र में शुरू में पैसे कम् ही होते हैं । हर किसी को कम पैसे में काम लेना पड़ता हैऔर बहुत काम करना पड़ता है । कई बार इसमें उससे जरुरत से ज्यादा मेहनत और जरुरत से कम् सफलता मिलती है । पर शुरू केदिन ऐसे ही होते है । इन् दिनों में हिम्मत और धीरज आपके साथी होते है। समय के साथ अनुभव और कौशल बढ़ता है – साथ हीआत्म – विश्वास और प्रबंधन की कला समझ में आती है। अपने १४ वर्ष के नौकरी के अनुभव के बाद यह मैं गारंटी से कह सकता हूँ की सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं है, अगर है, तो वह सफलता भी छोटी होती है ।

मुझे लगता है की फोटोग्राफी में पैसे कमाए जा सकते है।

प्रिय प्रबुद्ध

प्रिय प्रबुद्ध,

कई साल पहले एक दिन सुबह सुबह मैंने एक लोकप्रिय समाचार पत्र में एक तस्वीर देखी। उस तस्वीर में उस समय के २ बहुत विख्यात मॉडल – मधु सप्रे और मिलिंद सोमन, उस समय के हिसाब से, एक बहुत ही आपत्तिजनक मुद्रा में खड़े थे।  तस्वीर के साथ छपे लेख में लिखा था, की दोनों को पुलिस थाने बुलाया गया, और उनके साथ तस्वीर के फोटोग्राफर को भी। उस दिन आपका नाम पहली बार सुना। वह तस्वीर मैंने फिर कई बार देखी। कई कारणों से देखी। पर मुख्य कारण हमेशा और आज भी यही है – वह तस्वीर आपने सोची कैसे थी।

जीवन की आपाधापी और पढाई – नौकरी की जोड़ी ने आपके नाम को दिमाग के किसी पिछले हिस्से में डाल दिए। नाम याद आता था पर काम नहीं।

2013 – मैंने फोटोग्राफी की पढाई करने के लिए SACAC में दाखिला लिआ। हमारे पाठयक्रम में लद्दाख का १० दिन की शैक्षिक यात्रा थी।  एक अच्छे बच्चे की तरह पढाई करने की कोशिश की – क्या शूट करें और कैसे; लद्दाख में पहुँचने के ३ दिन बाद तक भी दिमाग में कुछ नहीं आया। लेह की मार्किट में चलते चलते, मैं और मेरी मित्र प्राची एक किताबों की दुकान में गए।  उस दुकान में आपकी किताब लद्दाख मिल गयी। १२०००/- की किताब थी; उस वक़्त खरीदने की हिम्मत नहीं हुई; आज सोचता हूँ की हिम्मत कर लेनी चाहिए थी।

प्रबुद्ध – शर्म नहीं करूँगा आपको यह बताने में की लद्दाख में बनाया मेरा फोटो प्रोजेक्ट Bereft आपकी किताब देखे बिना नहीं बनता। आपकी किताब में आपका अपने लद्दाख के अनुभव के बारे में नहीं पढता तो शायद कभी समझ नहीं पाता की मेरे साथ क्या हो रहा है।

लद्दाख एक बहुत ही सुन्दर जगह है। भांति भांति के लोग वहां विभिन्न प्रकार के कारणों से जाते हैं। नहीं पता की उनके साथ क्या होता है,परन्तु मैं बुरी तरह से ठण्ड और बंजार में; अपने अंतर्मन में चल रहे तूफ़ान से झूझ रहा था। लम्बी सूखी सड़क पर २ – ६ घंटे का सफर और गंतव्य पर उतर कर ठंडी हवा और वीराना। कोई साथी नहीं – सिर्फ बड़े बड़े पहाड़, पत्थर, बर्फ, खड़ा पानी, अजीब सा खाना, सांस लेने की दिक्कत। अपने पिता की याद में, बिछड़े सभी परिजनों और मित्रों की याद में, आने वाले दुःख और बीते हुए सुख रुला देते थे। यह भी जानता था की सभी संगी साथी मुझे आधे प्रयत्न और समय में ऐसी तस्वीरें बना लेंगे जिनकी मैं सिर्फ कल्पना ही कर सकता हूँ।

ऐसे में आपकी किताब मिली थी।

Bereft मेरे जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण काम है।  वह किताब मैं हूँ; उस किताब मैं, मै हूँ।

वापस आकर आपका काम और ध्यान से देखा। तब Longing  दिखा।

प्रबुद्ध – आप का काम मेरे लिए उस रौशनी की तरह है जो एक लम्बी अँधेरी रात में पथिक को आशा देती है। जितना आपको पढता हूँ और बार बार आपके काम को देखता हूँ, मेरी आँखें उतनी ही खुलती हैं और उतनी ही नम होती हैं।  अगर मुझसे कोई प्रेमका दृश्य सन्दर्भ मांगे तो मै उसे Longing दिखाता हूँ।

कुछ दिन पहले आपकी नयी किताब “प्रबुद्ध दासगुप्ता” बनाई गई। उसमे आपके विचारों को पढ़ कर लगता है की आजतक कितना गलत सोचता रहा; करता रहा। यह तो मैं सोचूंगा भी नहीं की इस जीवन काल में आपके काम के कहीं पास भी मेरा काम आएगा। यदि मैं आपकी संवेदना के कुछ प्रतिशत भी निकट आ सकूँ तो संतुष्ट रहूँगा।

आपका बहुत बहुत आभारी,

सोहराब हूरा

सोहरभ हूरा एक फोटोग्राफर है और एक लम्बे अंतराल और रघु राय के बाद मैग्नम फोटोग्राफर्स के भारतीय मूल के दुसरे सदस्य भी। पिछले साल सोहराभ का चुनाव मैग्नम के नॉमिनी के रूप में हुआ। ३४ वर्षीय सोहराब की कला की विशिष्टा हैं उनकी फोटोज में साफ़ साफ़ दिखती भावनाएं। बहुत से लोगों का कहना है की सोहराभ की तस्वीरें अपने अंदर की भावनाओं को बहुत ही सरलता से देखने वाले को व्यक्त कर देती हैं।

मैं इस कथन से इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ। कुछ तीन साल पहले सोहराब हूरा का नाम सुना और थोड़ा सा काम देखने का अवसर मिला। उस समय सुमित दयाल हमारे अध्यापक थे और उनसे निवेदन किया की वो सोहराभ को एक दिन के लिए क्लास में आने की निमंत्रण दे। सुमित मान गए और अगले दिन सोहराभ हमारी कक्षा में आये। अपने काम से हमें अवगत करवाया और हमारा काम भी देखा।

मेरा काम देख कर जो उन्होंने मुझसे कहा वो मुझे हमेशा याद रहेगा। उन्हें मेरा काम समझ नहीं आया। पर उसके बारे में और कभी.

फोटोग्राफी एक ऐसा घर है जिसमे सबके लिए कमरे हैं। और जो जितना अच्छा है वो उतनी ऊँची मंजिल पर रहता है। अब अच्छा होना यहाँ पढाई का फल नहीं होता। फोटोग्राफी कहीं अंदर से आती है और बनती जाती है आपकी हमसफ़र जीवन के विभिन्न पलों की। सोहराब ऐसी ही एक ऊँची मंज़िल पर है। वो शुरू से ही एक अलग स्थान पर हैं।

आज सोहराब हूरा का एक नया फोटो एस्से देखा। इसीलिए उनकी याद आई।

इंस्टाग्राम

कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम ने एक नया अद्यतन(अपडेट) निकाला।  इस अद्यतन के बाद आप अपने इंस्टाग्राम में लैंडस्केप और पोर्ट्रेट तस्वीरें लगा सकेंगे। अब तस्वीरों को वर्ग (स्क्वायर) आकार में समाने (क्रॉप) की आव्यशकता नहीं है। यह सुविधा आपको वीडियोस में भी मिलेगी।

इस नए अद्यतन का काफी उत्साह से स्वागत हुआ है। इंस्टाग्राम बहुत लोकप्रिय है और यह नई आज़ादी इसकी लोकप्रियता को जरूर बढ़ाएगी।

मेरा अपना अनुभव इंस्टाग्राम से एक लव – हेट रिलेशनशिप का है। मैंने इंस्टाग्राम का प्रयोग ३ साल पहले शुरू किया था। पहली तस्वीर मेरे मित्र अर्नव की थी; और एडिटेड नहीं थी। उस समय इंस्टाग्राम में फोटो एडिट करने की सुविधाएं भी कम् थी – फिल्टर्स कम थे और इन-फ़ोन एडिटिंग भी प्रतिबंधित थी। हर तरह की फोटो मैं इंस्टाग्राम पर लगाता और लाइक्स का बेसब्री से इंतज़ार करता।  आज भी करता हूँ।  तब औसतन ३ आते थे ; आज २० आते है।  मैं नौकरी शुदा आदमी हूँ, सारा समय फोटोग्राफी नहीं कर पाता; तो इंस्टाग्राम एक माध्यम बना की मैं नौकरी के साथ साथ फोटोग्राफी भी जारी रखूं।  और एडिटिंग में मेरा हाथ पहले ही तंग है, तो इंस्टाग्राम की एडिटिंग सुविधाओं का फायदा भी उठाया। हैशटैग सीखे और देखे ; फेसबुक और ट्विटर से अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को जोड़ा।

और फिर एक दिन मैंने एक तस्वीर “ट्रांसजेंडर्स इन सेलिब्रेशन” बनाई। उस हफ्ते वह तस्वीर इंस्टाग्राम ने अपने ब्लॉग में लगाई। और मेरी दुनिया बदल गई।

आज मैं अपने आप को फोटोग्राफर से ज्यादा इन्स्टाग्राम्मर मानता हुँ। और यह भी मानता हूँ की इंस्टाग्राम पर बीते ३ वर्ष में मेरी तकनीक और मानसिकता बदलने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।  वर्ग आकार में फोटो बनाना एक चुनौती थी। उससे बड़ी चुनौती मेरे लिए अपने मूल के पास जाकर फोटो बनाना थी।  फ़ोन आपको मजबूर करता है की आप अपने सब्जेक्ट के पास जाएँ।  अगर नहीं जाते तो फोटो देख कर रोबर्ट कापा याद आते हैं जिन्होंने कहा था की अगर आपकी फोटो अच्छी नहीं तो आप सब्जेक्ट के पास नहीं हैं।

मैंने इंस्टाग्राम पर प्रोजेक्ट्स शुरू किये और अब वह भिन्न भिन्न चरणो में है। आप मेरा काम @carticaya पर देख सकतें हैं।